भारतीयों के लिए ये जश्न का समय है, ऐसे मौके पर विरोध हताशा की पराकाष्ठा
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मनोहर मनोज
अभी अंतर्राष्ट्रीय भू राजनीति में जिस तरह से भारत को निरंतर महत्व मिल रहा है वह भारतीयों के लिए एक जश्न का मौका लेकर आया है। पर ये जश्न मुख्य विपक्षी कांग्रेस पार्टी के लिए जलन का सबब बन गया और उनके कुछ युवा कार्यकर्त्ता अपने राजनीतिक आकाओं के आदेश पर टॉपलेस प्रदर्शन जैसी बेशर्म हरकत कर बैठे । वस्तु स्थिति ये है की हाल फ़िलहाल अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत के हवाले से घटित तमाम घटनाक्रमो ने भारतीयों के मस्तक को ऊँचा किया है। पहले ब्रिटेन, फिर ओमान, यू ए इ, न्यूज़ीलैण्ड के साथ भारत का गत वर्ष हुआ व्यापार समझौता, फिर यूरोपीय यूनियन के साथ इस साल हुआ व्यापार समझौता जिसे मदर ऑफ आल डील बताया गया। इन समझौतो के बाद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के जरिये टूटा द्विपक्षीय संबंधों का गतिरोध, फिर भारत में दुनिया का पहला आयोजित ए आई शिखर सम्मलेन और भारतीय प्रधानमंत्री की सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस्रायल यात्रा। वैसे तो मोदी सरकार के विरोधी भी इस सरकार के विदेशी मोर्चे पर पिछले 12 सालों में मिली सफलता को दबे मन से स्वीकारते रहे हैं। पर पहलगाम के बीभत्स आतंकी वारदात के बाद भारत ने जो ऑपरेशन सिन्दूर के जरिये पाकिस्तान के पहले आतंकी ठिकानों और फिर सामरिक ठिकानो को जो चोट पहुंचाई उसके बाद से अंतर्राष्ट्रीय राजनीती की परिस्थितियों ने इस तरह से करवट लिया जिसमे नैतिक रूप से विजेता देश भारत पराजित मानसिकता में आने को मजबूर हो गया और ऑपरेशन सिन्दूर के जरिये बुरी तरह से पिटे देश पाकिस्तान अपने झूठे प्रोपोगंडा और अमेरिका में अपनी लॉबिंग के जरिये वहा से मिले कम्प्रोमाइज़्ड समर्थन से अपने को विजेता मान बैठा। ऐसा विजेता जिसमे उस देश के सेना प्रमुख ने अपनी पदवी फील्ड मार्शल की करा ली, अपनी सेवा का विस्तार करवा लिया और संविधान संशोधन के जरिये आजीवन यूनिफार्म में रहने और अपने को किसी भी मुक़दमे से वंचित रखे जाने की गारंटी ले ली। यहाँ तक तो ठीक था पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पाक युद्ध विराम के श्रेय लिए जाने को भारत की तरफ से पुष्टि नहीं मिलने का उनपर इस तरह से फ़्रस्ट्रेशन बढ़ा की उसने पाक फौजी जनरल को अपने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में एक शासनाध्यक्ष की तरह आमंत्रित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत को इस इस तरह से चिढ़ाए जाने और भारत के रूस से तेल खरीदने की सजा के रूप में उस पर पहले 25 और फिर 25 प्रतिशत का टेरिफ लगाया गया। दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के भारत के प्रति इस रवैये से भारत अंतरराष्ट्रीय पटल पर काफी समय तक मनोबलविहीन बनकर रहा। इस दौरान सऊदी अरब के पाकिस्तान से हुए सामरिक समझौते तथा बांग्लादेश में हो रहे भारत विरोधी हरकतो ने भारत के तनाव को बढ़ाने का ही काम किया। हालाँकि इस दौरान भारत ने अमेरिका से कोई जबाबी कार्रवाई और बयानबाजी से अलहदा रहकर चीन और रूस के साथ अपने रिश्ते को अपनी शर्तो पर पुख्ता करने, दुनिया के अलग अलग देशो के साथ व्यापार समझौते की कवायद करने और आत्मनिर्भरता के जरिये आयात प्रतिस्थापन को त्वरित करने का काम किया। अंततः भारत को इसका देर से ही सही पर परिणाम आना शुरू हो गया ।
मेरी नज़र में पिछले एक साल में भारत का सबसे अच्छा समय तब आया जब भारत ने इस बार अपने गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद् के अध्यक्ष अंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्षा उर्सुला वोन डेर लेयेन द्वय को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। और समारोह के अगले दिन भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा हुई। इस घोषणा के तहत में यूरोपीय यूनियन द्वारा भारत से आयातित 95 प्रतिशत उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इस समझौते से दुनिया की कुल जीडीपी का करीब 25 प्रतिशत प्रभावित होने जा रहा है। दूसरा इस समझौते से भारत का 135 अरब डॉलर का मौजूदा कारोबार 500 अरब डॉलर तक पहुंचेगा । इस समझौते के दौरान ये सबसे अहम् घोषणा रही की अगले चरण में यूरोपीय यूनियन भारत से सामरिक समझौता भी करेगा । अभी अमेरिका अपने यूरोपीय मित्र देशों और नाटो पर जिस तरह से अपना अहसान जताता रहता है, उनपर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देता है और दूसरी तरफ चीन के एक अलोकतांत्रिक देश होने व उसकी व्यापारिक और सामरिक विस्तारवादी नीति से समूचा यूरोप तंग महसूस कर रहा है। ऐसे में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सर्वाधिक तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था भारत पर उनकी नज़रे टिक गयी हैं ।
यूरोपीय यूनियन से हुए इस समझौते से अमेरिका पर एक निर्णायक असर पड़ा। हालाँकि उसने पहले इस समझौते के लिए ई यू की यह कहकर आलोचना की उन्होंने उस देश से समझौता किया जो उनपर हमलावर देश रूस से तेल खरीद रहा है। लेकिन इस आलोचना के बावजूद अमेरिका ने भारत के पक्ष में बन रहे वैश्विक संतुलन को तवज्जो दी और दोनों देशों के बीच अरसे से चल रही लचर व्यापार वार्ता एक हफ्ते के भीतर समझौते की शक्ल ले ली। और दोनों शासनाध्यक्षों ने अपने अपने ट्वीट के जरिये इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की।
इस समझौते के बाद भारत ने ए आई पर जो बेहद सफल पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन किया वह तो अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत का सबसे सुपर शॉट था। दुनिया के करीब 95 देशो के राजनीतिक, वाणिज्यिक और बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के धुरंधरों ने इसमें शिरकत की। इस सम्मलेन ने यह साबित कर दिया की भारत फिलवक्त ए आई के मामले में दुनिया की तीसरी महाशक्ति है पर टैलेंट पूल के मामले में वह दुनिया का सबसे अव्वल देश है। इस सम्मलेन में इस नव उभरती क्षेत्र को परिभाषित और अनुशासित करने, जिम्मेदार और नैतिक बनाने को लेकर सबने बल दिया पर भारत ने इसे मानवीय बनाये जाने की एक नयी अवधारणा शामिल की। पर सबसे अहम् भारत की इसमें मिली निवेश सफलता थी। इसके अंतर्गत डाटा सेण्टर, सम्बन्धित अवसंरचना तथा सम्बंधित प्रौद्योगिकी विकसित करने हेतू भारत में करीब 250 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश दावा किया गया । भारत सरकार का मानना है इस सम्मलेन के जरिये भारत ने दुनिया के अधिकतर देशो का भरोसा जीता है।
अभी भारतीय प्रधामनंत्री की इस्राएल यात्रा सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस्राएल सामरिक दृष्टि से दुनिया का सबसे सक्रिय देश है जो हर समय अपनी युद्ध परीक्षा देता रहता है साथ साथ युद्ध की अत्याधुनिक तकनीक, हथियार और गुप्तचर सभी मामले में दुनिया इस्राएल का लोहा मानती है। ऐसे में भारत से इस्रायल की निकटता भारत के लिए काफी मायने रखती है।
कुल मिलाकर भारत के सब्र और धैर्य का ये प्रतिफल है की वह दुनिया के कूटनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय भू राजनीती में हर अनैतिक तत्वों का मुकाबला करके अपना सही संतुलन साधने में वह सफल हुआ है। ऐसे में यह अवसर जश्न मनाने का है पर कांग्रेस पार्टी जिसके हर राजनीतिक दांव को बीजेपी अबतक पटकनी देती आयी है वह अब इतनी हताश हो गई है की अपना विरोध जताने के लिए वह देश में आयोजित इस गौरवपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन की जगह तलाशती है। पर शुकर की बात ये रही की देश की सभी सियासी पार्टियों ने कांग्रेस की इस हरकत की पुरे तौर पर मजम्मत की।

