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आपराधिक कानून भारतीय न्याय  कानून 2023 , भारतीय नागरिक सुरक्षा कानून 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 का 1जुलाई 2024 से लागू होना**

आपराधिक कानून भारतीय न्याय  कानून 2023 , भारतीय नागरिक सुरक्षा कानून 2023 तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 का 1जुलाई 2024 से लागू होना**
आचार्य (डा0) विक्रम देव *गो पुत्र*
 उपरोक्त तीनों कानूनो को नए रूप में देश के सामने लाया गया  है।  लेकिन जिस तरह सूचना का अधिकार  कानून  नौकरशाही ने बेकार कर दिया l जिस प्रकार तीन तलाक कानून मौलवियों ने निष्प्रभावी कर दिया, इस तरह उपरोक्त तीनों कानूनो की अच्छाइयां भ्रष्ट सरकारी अधिकारी प्रभावित न करें ! एक प्रावधान जरूरी है कि पीड़ित व्यक्ति देश के किसी भी कोने से किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है, भले शिकायत किसी दूसरे राज्य का हो तो भी ! पहले भी प्रावधान था किंतु पुलिस बहाना बनाकर लागू नहीं करती थी  l
 
कानून की मनसा के अनुरूप थाना कार्य करें, इसके लिए आपको एक व्यवस्था करनी होगी l कानून में  है कि दायर शिकायत की एक प्रति मिलनी चाहिए, वह मिलेगी, वास्तव में पुराने कानून के तहत हर प्रकार की प्रति शिकायतकर्ता को मिलनी है, यहाँ तक कि पुलिस द्वारा जांच का  अंतिम प्रतिवेदन उसकी भी प्रति मिलनी है लेकिन  दुख के साथ बताना पड़ता है कि पूरे देश में पुलिस अपने अनुसंधान रिपोर्ट में लिखती है की अंतिम प्रतिवेदन की एक प्रति शिकायतकर्ता को भेजी जा रही है लेकिन आज तक देश में किसी को मिली ही नहीं  l 
 
नए कानून के तहत गिरफ्तारी के समय और गिरफ्तारी के बाद उसकी पूरी जानकारी उनके आसपास के लोगों को उनके परिवारजन को देना अनिवार्य है, न्यायालय का निर्देश भी आया है, कई बार लेकिन पुलिस उसका कभी भी पालन नहीं करती है l इस कानून के बाद भी पालन करेगी, इसका भरोसा राज्य सरकार को दिलाना हैl  अपराध स्थल का फॉरेंसिक जांच करना, अपराध स्थल का वीडियो ग्राफी करना यह तो पहले से भी चलन था और जो लोग तेज तर्रार पुलिस अफसर हुआ करते थे,  वे इसका उपयोग पहले भी करते रहे, अब आपने इसको कानूनी मान्यता कर दिया है, बाध्यता कर दिया है तो आशा है कि थाना द्वारा या पुलिस द्वारा जो मनमानी की जाती थी, साक्ष्य से छेड़खानी किया जाता था, वह कम होगा या समाप्त हो जाएगा l
 
 समन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने की कानूनी प्रावधान  का हम प्रशंसा करते हैं l सरकार ने कानून बना दिया की अपराध के बाद महिलाओं और बच्चों को सभी अस्पताल  में निशुल्क प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करेंगे क्या यह सिर्फ कानून बना देने से संभव है ?  इसके लिए   प्रबंधकीय व्यवस्था राज्य सरकार को करनी है l**
 
 छोटे-मोटे अपराधों को दंड की श्रेणी से हटा करके  उसको अन्य प्रकार का शारीरिक श्रम में शामिल करना जैसे समाज सेवा तथा अन्य गतिविधि एक अच्छी  शुरुआत है क्योंकि छोटे अपराधों में जो जेल जाता था उसमें से अधिकांश लोग बड़े अपराधी बनकर के बाहर निकलते थेl यह चलन हो गया था कि विदेश से अपराध का संचालन किया जा रहा है अतः  विदेश में भी रहकर अगर कोई अपराध करता है अपराध से संलग्न होता है तो उस पर भी भारत में मुकदमा दर्ज होगा  l .मॉब लिंचिंग पहले ही अपराध के श्रेणी में था लेकिन आपने एक नया कानून लाया  इससे मोब लिंचिंग की घटना मैं कमी आएगी…
 
अंत में आपने जो कानून बनाए उसमें सबसे अच्छी बात यह है कि न्यायालय में जो वकील तारीख पर तारीख लेते जाता था आपने उसको 2 तारीखों में बांध दिया है…
 
 आपने सबके लिए कानून बना दिया सबके भले के लिए बना दिया त्वरित न्याय के लिए बना दिया इस कानून से सबसे अधिक फायदा बच्चों का होगा जिनका जीवन बर्बाद हो रहा था सुधार गृह में परिवार का होगा जिनकी महिलाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा था महिलाओं को सम्मान मिलेगा महिलाओं की सुनी जाएगी और अंत में परिवार का भला होगा l
 
लेकिन इसकी सफलता  के लिए जरूरी है कि एक राज्य स्तरीय समिति बने जिसमें जन प्रतिनिधियों के अलावा अन्य लोग भी रहे और इसको हाई कोर्ट के तहत काम कराया जाए और यह हर 3 महीने में समीक्षा रिपोर्ट प्रकाशित करें और इसमें देखें की पुलिस और न्यायालय किस प्रकार ईमानदारी से नए कानून को लागू कर रही है. 
लेखक संस्थापक अधिष्ठाता: लोक कल्याण पीठम, अध्यक्ष: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ पीयू परिसर
पूर्वांचल विश्वविद्यालय यमदग्निपुरम (जौनपुर) पिन कोड 222003 (उप्र) हैं। 

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